Qoee Beemaar Hamasa Nahin Hai Life Shayari

 


क़ोई बीमार हमसा नहीं है…

क़ोई इलाज तुमसा नहीं है….



कितना अच्छा होता तुम जो मतलबी होते

और तुम्हें सिर्फ मुझसेमतलब होता ।



रूह रंग डाली मैंने तेरे इश्क़ में,

अब क्या बचा मुझमे रंगने के लिए….. 


इश्क़ बिखरा है फिज़ाओं में साथ रंग के घुलकर..❤️

महक रहा है ज़हन में तेरा खयाल गुलाल के जैसा🤗😍



मैं कितने भी रंगों में

क्यो ना रंग जाऊं

एक तेरा रंग ना लगे

जिन्दगी बेरंग सी लगती है ।


मुझे महसूस होती है छुअन तेरी ओठों की,

तुम तन्हाई में मेरी तस्वीर चूमती हो क्या  !



उसे पता ही नही था,सलीक़ा महोब्बत का..

मेने चाह कर बताया उसे,ऐसे चाहा करते है….



इस होली…. मुर्शिद रंग भी तरसेंगे,

 हय मुर्शिद आँखे भी बरसेंगी…



रंग लिया है सारे रंगों में अपने आपको।

पता नही किस रंग में तुम्हे पसंद आ जाऊं।



मैं विकल्प तो नहीं कि किसी और के बाद याद आऊं..

मुझसे पहले गर कोई हो बेहतर हैं मुझे भूल जाया जाये. .. .!!



एक तरफ़ा युही हम तुम पर मरते रहेंगे,

सुनो ना यार ऐसा हम कब तक करते रहेंगे,

दोस्त बनके रहते है ना दोस्त,

आशिकी में तो हम तुम मरते रहेंगे….😊



मुर्शिद ,

ये ज़ालिम समाज हम से खेल बुरा खेल गया,

हाय मुरशिद…. 

औऱ हम देखते रह गए एक बेजुबान बच्चे की तरह ….



मुर्शिद ,

हमारे बास्ते बस वो एक शख्स था …..

 हय मुरशिद,

 वो एक शख्स भी तकलीफ़ दे गया….



रास आ गए हैं कुछ लोगों को हम …

कुछ लोगों को, ये बात भी रास नहीं आयी !!!



दो चीजें “बेहद” खुबसूरत हैं।

मेरे पास, एक तुम…

और एक हर पल यादें तुम्हारी


के बड़ी मुश्किल से मिला हु ,

मैं खुद से ,के अब मैं दिल की बातों पर भरोसा नहीं करती…..




तुम्हारे बगैर ,
किस बात की  होली….
बस एक दिन ही था,
जैसे तैसे गुजर ही गया….




इश़्क करो तो बेहिसाब करो
बिछड़ना तो एक दिन जाहिर है,

जो बेइन्तहा चाहत से रुह में उतर जाए
सिर्फ़ वही मोहब्बत में माहिर है।



इतनी मुदत से दूर हु तुझसे,
के अब तुझे देखु तो पागल हो जाऊं….



ज़रा सी बदनामी भी हो मोहब्बत में,

वरना यह ज़माना आशिक नहीं कहेगा ।





कुछ मुझको भी पसंद है काला रंग,

कुछ कमबख्त उसपे जचता भी बहुत है !!



करीब आओ तो मेरे अपनो से मशवरा करना,

बेसक लिखता अच्छा हूँ, पर आदमी खराब हूँ!




मेरे ख्यालों में कोई रहता गुमनाम…. यानी कि तुम. 

दुनिया में मशहूर मोहब्बत का नाम…. यानी कि तुम .

सागर किनारे एक शुनहरी शाम….यानी कि तुम

हजार तकलीफों का इकलौता आराम…. यानी कि तुम…



आज पास हूँ तो क़दर नहीं है तुमको,,,

 यक़ीन करो टूट जाओगे तुम मेरे चले जाने से..!



सब कहते है शायरी के सरताज है हम…

पर उस की वाह सुनने के मोहताज है हम…



हद उसके लिए पार करो,

जो  तुम्हारे  लिए  बेहद  हो..

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