MUJHE MAHASOOS HOTEE HAI CHHUAN TEREE HONTHON KEE, Life Shayari,

 


मुझे महसूस होती है छुअन तेरी होंठों की,

 तुम तन्हाई में मेरी तस्वीर चूमते हो क्या…


फ़ासले हमारे बीच ऐसे भी आए,


अलविदा कह कर भी जुदा ना हो पाए….



कोई ऐसा दिन भी आये ख़ुदा करें,

मेरा होने के लिए वो मुझसे झगड़ा करें…



जुल्फें बगावत पर है आज उनकी, शायद,

मेरे हाथों से संवरने की जिद्द है उनकी ..



मुलाक़ातों में ज़रा सा फासला रखिये हुज़ूर…

लोग कहते हैं बेताबियों में इश्क़ खूबसूरत होता है।


मैं अक्स वहीं, जिसकी पहचान हो तुम,… मैं इश्क वहीं, जिसकी इबाबत हो तुम,…

मैं सफर वहीं, जिसकी मंजिल हो तुम,… मैं इंतहा वहीं, ज़िसमें बेइंतहा हो तुम…..


अब मोहब्बत करेंगे पर बात नही करेंगे,

तुम्हारे शहर में आएंगे जरूर पर मुलाक़ात नही करेंगे…


रात को सोते हुए एक बेवजह से ख़्याल आया,

सुबह ना जग पाऊ तो  क्या उसे ख़बर  मिलेंगी कभी…



वो मोहब्बत भी फ़िर क्या मोहब्बत है,

जहा मेहबूब के बिछड़ जाने का डर ना रहें…



जो भी गया अपने साथ मेरा एक हिस्सा ले गया,

अब ना जाने कितने टुकडों में बॅट गया हूँ मैं…   🥺🥺


फंदे से लटक रहा इश्क़, कितना बिलखकर कोसता होगा, सात फेरों की रस्मों को…. 😔😔



मैं भी बहुत अजीब हूँ… इतना अजीब हूं कि बस…

कि ख़ुद को तबाह कर लिया…औऱ मलाल भी नही…


मेहबूब के लिए तड़पना, इश्क़ है, मर जाना नही.!



कि इस बार कुछ तब्दीलियां की जाएं,

प्यास आंखों की जगह उंगलियों की मिटाई जाए….



एक आँसू भी हुकूमत के लिए खतरा है,

तुमने देखा नहीं आँखों का समन्दर होना..!!



फ़क़ीर मिजाज हु ख़ुद को औरो से जुदा रखती हूं…..

लोग जाते है मंदिर-मस्जिद ,मैं दिल मे ख़ुदा रखती हूं…..



कुछ कमी सी लगती है तुम बिन

ना रंग है ना रोशनी है तुम बिन,


वक्त अपनी रफ्तार से चल रहा है

बस धड़कन थमी सी है तुम बिन,


ना बारिश है ना धुआं है फिर भी

दिल में तपिश सी है तुम बिन,


बहुत रोका है बादलों को बरसने से

फिर भी आंखों में नमी सी है तुम बिन।



उसको भूलने की कसमें खाकर भी,

हमने हर राह में उसे ही ढूंढा है।।



इश्क़ में बढ़ रही है बेचैनियाँ, 

थोड़ी सी शरारत करने दो…

छुपा के रख लो अपने दिल में, 

या फ़िर,मोहब्बत बेशुमार करने दो.।



उठ ना जाये तुमसे एतबार ज़माने का …

ऐ मोहब्बत किसी के नसीब में तो आ….!!❤️



खुद को बेकार समझता था मैं,

कदर पता चली जब उसने इस्तेमाल किया मेरा।।।



तुम महकना छोड़ दो मैं बहकना छोड़ दूँ….

तुम अदाएँ बख्श दो मैं आवारगी छोड़ दूँ….

तुम आँखों में बसा लो मैं तैरना छोड़ दूँ….



अब मोहब्बत करेंगे पर बात नही करेंगे,

तुम्हारे शहर में आएंगे जरूर पर मुलाक़ात नही करेंगे….



मामला कभी इस हद तक बढ़कर आया ही नहीं,

आपने कभी हमें हक़ से गले लगाया ही नहीं….


तुम्हे भूलकर क्या होगी दिल की हालत,

कभी किसी आइने पर पत्थर गिरा के देखो.!


सिर्फ ज़रूरतों में ही ना याद किया करो मुझे,

ग़लतफहमी सी होती है के मैं खुदा तो नहीं ।

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