Udaas Ghataen Dekhe Ya Sulagatee Havaon Ka Manjar Dekhe Life Shayari,

 

उदास घटाएं देखे या सुलगती हवाओं का मंजर देखे..

यहां हर हाथ मे खंजर है कहो किस हाथ का खंजर देखें..?



तौहीन-ए-वफ़ा होगी, 

जो हर सूरत पर दिल आए।।

पाबंद है निगाहें मेरी,

सिर्फ मेरे महबूब पर..!!


तेरी खुशबू, तेरी चाहत, तेरी यादें लाये हैं,

आज फिर मेरे शहर में बादल आये हैं।


दुनिया मे लोग सारे भूखे ही हैं,

     फर्क सिर्फ इतना हैं कि सबकी भूख अलग अलग  हैं।


हैरत हैं ए जिंदगी मुझे अपनी जिंदगी पर,

मर गया हूँ लगता हैं मुझे साँसे तो चल रही हैं पर।


तुम हिने चोट दी,

मरहम भी तुम बन गए,

तुम्हारी दुश्मनी में

मुहोब्बत क्यों महकने लग जाए?




उनका याद आना भी कमाल होता है ….

कभी तो आकर देखे वो भी हमारा क्या हाल होता है



तारीफ अपने आप की करना फिजूल है,

खुशबू खुद बता देती है कौन सा फूल है।




हादसों ने कुछ इस तरह संवार दिया…
कि जो पहले थे वो अब “हम” नहीं…
और जो अब “हम” हैं…
उसमें कम्बख्त “हम” ही नहीं…!



कितना कुछ कहना होता है न तुमसे…
लेक़िन खुद को समेट लिया करता हूँ..
मैं ख़ुद के ही दायरे में।



तेरी रज़ा रहे…और तू ही तू रहे 
बाकी ना मैं रहूं ना मेरी आरज़ू रहे 
जब तक की तन में जान रहे … रगों में लहू रहे 
बस तेरा हो ज़िक्र और तेरी जुस्तजू रहे !!!! 





हर वो शायरी जिसमें हमने..
तुझे अपना महबूब लिखा..

जमाने ने सुना और कहा..
वाह क्या खूब लिखा..




दिलमे शफ़क़त थी तुम्हारे लिए,
तुमने मुहोब्बत समझली।

इश्क़ की चाहत में तुमने,
दोस्ती की बेमतलब सूली चढ़ादी।



और कितना दूर जाऊँ तेरी यादों से..

अब तो, कुछ अपना अक्स ही, 
अंजाना सा लगता है….



सलीका जरा अलग सा होता है
ढलती उम्र के इश्क़ का।



हमनें तो कसर बाकी ना रखी तुझे अपना बनाने में..
एक तुम ही हो जो पहचान छुपाए बैठी हो..




लगा लेना काजल अपनी आँखों में जरा,
ख्वाब बनकर दाखिल होने का इरादा है मेरा !






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