इश्क में हम सब कुछ गवां बैठे

 

दरगाह हो जाती है वो आम सी दहली़जे भी,
इश्क बरसो़ जहाँ किसी की राह तक़ता है…


इश्क में हम सब कुछ गवां बैठे

उन्हें खिलौने की जरूरत थी 
        हम दिल थमा बैठे____!!



खिलौना बन गया हूँ इश्क में तेरे 
अब खिलौना तुझे और क्या चाहिए 
दिल दिया है खेलने को मेरा 
अब मेरी क्या जां चाहिए ।


तुम्हारे दिल से ना तब खेले थे ना आज खेलेंगे आदत तो तुम्हें हे दिल ले जाने की और फिर वापस ना करने की



मेरी शायरी दिल से पढ़ने वालो मुझे आदत ना बना लेना,
मैं ठहरा हुआ सागर हूँ कहीं आपके दिल में ना ठहर जाऊं ।




मेरी शायरी चुराने की कोशिश न करना 
मेरे अल्फ़ाज़ सूली तक ले जाते हैं 



उसकी हर बात है सर आंखो पर
मेरी हर बात ही रद है।  हद है


मेरे तो लफ़्ज़ भी कोड़ी के नहीं
उसका नुकता भी सनद है  हद है


बे-तहाशा हैं सितारे लेकिन 
चाँद बस एक अदद है, हद है 
अश्क आँखों से ये कह कर निकला 
ये तिरे ज़ब्त की हद है? हद है


ज़िन्दगी को है ज़रूरत मेरी 
और ज़रूरत भी अशद है__ हद है



हद नही है कोई हमारी मोहब्बत की
रात भर बस यूँ ही 
हमारी राते गुजरती हैं 
कभी चाँद हमसे तो हम चाँद से
गुफ्त्गू किया करते हैं


बात करनी है तेरे बारे मैं 
सुनने वाला भी खूबसरत हो 


तेरे बारे मे तो हम 
हर शक्स से बात किया करते हैं 
फकत तुम्हे ही खबर नही


बत्ती गुल तो कहानी भी ख़त्म
सांस भर की जरूरत है जिंदगी।


तुझे खबर नहीं शायद के एक नौ जवान  लड़का

वबा के दिनों में भी तेरा हाथ चूम सकता है


गूंजते रहेंगे तुम्हारे “जहन” के गहराइयों में रात दिन,
जिसे तुम भुला ना सकोगे वो “गुफ्तगू” है हम…❤️


मौत का भी कोई इलाज हो शायद 
ज़िन्दगी का कोई इलाज नहीं


जिंदगी का एक इलाज़ बताया गया है,
वक्त को दवा और ख्वाहिशों का परहेज बताया गया है।।



ख्वाहिशें तो राख हो चुकी हैं अब वक्त भी हुआ नासूर
जिस दिन तेरी नजर का शिकार हुए थे मेरे तो उसी दिन थे।
कमबख्त जो भी था बस वो था इस दिल का कसूर।



दिल का तो यहीं दस्तुर हैं,
एहसास है तो भी ये कसूर है,


एहसास जो तेरी नजर का था पहला आज भी मुझे याद है क़त्ल किया हमें फिर कहा दफनाया ये भी एक राज़ है।



जिंदगी में किसी और चीज की ख्वाहिश नहीं है तुम मिल जाओ तो मेरी सारी ख्वाहिशें पूरी हैं 😍


जिंदगी वही खड़ी है क्यो की वो मिलते ही नही 
लगता है आँखे बंद हो जायेंगे उन्हे देख देख के।

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