VAQT VAQT KEE BAAT HAIN NA LIFE QUOTES SHAYARI,

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वक़्त वक़्त की बात हैं ना ,

कल तक लगता तुम्हारे लिए अहम हैं हम,

अब लगता हैं फ़क़त एक वहम है हम।


तुम्हारी नजाकत भरी बाते,

मुझे काफी उलझा देती हैं।

तुम्हारी मुहोब्बत में चूर नजरें,

मुझे काफी सहमा देती हैं।

तुम्हारी दिलकश अदाएँ,

मुझे तुमसे लिपटी रखती हैं।

तुम्हारी हर शरारत भरी हरकत,

मुझे सिर्फ तुम्हारी बनाए रखती हैं।



चैत के महीने में भी,

वो अपनी मर्जी से बरसता हैं।

मुक्कमल हो ही जाए उनको उनकी मुहोब्बत,

या खुदा तुझे तेरे शहर का वास्ता हैं।



तुम्हारी मुहोब्बत ने मेरी आदतें बिगाड़ दी हैं,

दिन हो या रात, दिल की प्यास बुझती ही नही हैं।



गुमान ना कर ए रात अपनी लंबी होने पर,

अधूरा इश्क़ तेरी ही पनाह लेता हैं इश्क़ मुक्कमल ना होने पर।



इश्क़ मुक्कमल होने ही वाला था,

की कमबख्त नींद ने धोखा दे दिया।


कमाल की खूबसूरत थी वो,

जुबां से ज्यादा आँखोंसे बोला करती थी।

यूँ तो बतियाने से भी डरती थी वो,

पर प्यार हमसे बेहिसाब किया करती थी।



वक़्त बहुत कम हैं,

थोड़ा वक्त निकाल लिया करो।

वक़्त के अपने रुतबे हैं,

फुरसत का लालच इसे ना दिखाया करो।



आज मैं कैसे अपना दिल फिरसे नही हारता,

वो आँखोंमें कजरा और जुल्फोंको आझाद छोड़ आई थी।



आज आईने को मैंने जलता हुआ देखा,

जबसे तुम्हारे आँखोंमें देखा, मैने खुदको आईने में नही देखा।




न जाने क्या क्या खूबी उन्होंने अपने अंदर छुपाये रखी हैं,
नजरोंसे भी वो हमें छू जाते हैं,इतना मेरा चैन न जाने कहा समिटे रखा हैं।





उसका मेरी और देखना,
मेरा आंखे चुराना,
उसका मुझ पर हसना,
मेरा दिल से खुश होना,
उसका मुझसे मिलना,
मेरा धड़कनों को संभालना,
उसका मुझपे गुस्सा करना,
मेरा दिल मे सेहम जाना,
उसका मुझसे लड़ाई करना,
मेरा दिल में खोने का डर जागना,
उसका मुझसे रूठ जाना,
मेरा उसको मनाना,
उसका मुझसे प्यार करना,
मेरा उसपे दिल हार बैठना….

हा यही तो कहानी है मेरी ओर मेरे हमसफ़र की।




कहा जमींदारोंसे उलझते हो कारीगरों,
जीते जी नही सही,पर मौत के बाद जरूर दो गज जमीन तुम्हारे नाम होगी।




मैं मुसाफिर हूँ,
तुझमे ही सफर करता रहूँ,
यही हैं आरजू मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
मंजिल तक कभी जा ही ना पाऊं,
यही हैं तमन्ना मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
तेरी ही राहोंपर भटकता रहूँ,
यही हैं चाहत मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
तेरी ही पनाहोमे जिंदगी गुजार दू,
यही हैं ख्वाहिश मेरी।


तलब सी होगयी हैं लगता हैं अब मुझे,
तुमने कुछ इसकदर मुझे अपनी बनाया हैं।




मैंने पूछा इश्क़ करते हो? कितना ?
उसने कहा आसमां का विस्तार हैं जितना।
मैंने पूछा इंतजार करलोगे? कैसे ?
उसने कहा चातक जैसे करता हैं इंतजार बारिश का।




प्यार हैं तुमसे मुझे और कोई बंधन नही चाहिए, 
प्यार खुद एक बन्धन हैं, जो बांधता नहीं, बंध जाता हैं।





तसव्वुर तक मुझसे खफा खफा से हैं,
एक वही जरिया था तुमसे मिलने का।




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